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यूपीए के सहयोगी दलों की सीटें घटने से लोकसभा में विपक्ष की आवाज मंद पड़ने के आसार

यूपीए के सहयोगी दलों की सीटें घटने से लोकसभा में विपक्ष की आवाज मंद पड़ने के आसार

अख़बार जगत । यूपीए की सीटें थोड़ी बढ़ने के बावजूद लोकसभा में सरकार से जूझने वाला विपक्ष वास्तव में कमजोर पड़ गया है। यूपीए के सहयोगी दलों तृणमूल कांग्रेस, टीडीपी और वाम मोर्चे की सीटें घट जाने से लोकसभा में विपक्ष की आवाज मंद पड़ने के आसार हैं। तटस्थ दलों समेत समूचे विपक्ष की बात करें तो कुल मिलाकर उन्हें महज 10 सीटों की बढ़त हासिल हुई है।

पिछले लोकसभा चुनावों से तुलना करें तो यूपीए को कुल 60 सीटें मिली थीं, जो इस बार बढ़कर 91 हो गई हैं। यानी यूपीए को 31 सीटों की बढ़त मिली है। मगर, लोकसभा में 91 सीटों का आंकड़ा मायने नहीं रखता है, खासकर जब प्रचंड बहुमत वाली एनडीए की सरकार हो। पिछली लोकसभा में सरकार के खिलाफ संसद के भीतर और बाहर मोर्चा संभाल रहे दलों की संख्या 22 के करीब पहुंच गई थी। इसमें यूपीए में शामिल दलों के अलावा प्रमुख सहयोगी दल भी शामिल थे, लेकिन उनमें से ज्यादातर का प्रदर्शन इस बार खराब रहने से विपक्ष की स्थिति कमजोर नजर आ रही है।

यूपीए के साथ खड़े होने वाले प्रमुख दलों तृणमूल, टीडीपी, वाममोर्चा और आप को पिछली बार 65 सीटें मिली थीं। मगर, इस बार इन चार दलों के पास महज 31 सीटें हैं। यूपीए और इन चार प्रमुख सहयोगियों को जोड़ें तो पिछली बार लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व 125 सीटों का था, जबकि इस बार यह घटकर 122 सीटों का रह गया है।

सपा-बसपा का रुख स्पष्ट नहीं

लोकसभा में अच्छी सीटें जीतने वाले गैर भाजपा दलों को दो और श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। इनमें से सपा-बसपा (गठबंधन) को यदि एक श्रेणी में रखा जाए तो पिछली बार इनके पास महज पांच सीटें थीं, जो इस बार 15 हो गई हैं। लेकिन ये दल कभी यूपीए के साथ खड़े दिखते हैं और कभी नहीं। फिर भी यदि इन्हें यूपीए के सहयोगी दलों के साथ रखा जाए तो भी स्थिति बहुत ज्यादा अलग नहीं होती है। इन दोनों को मिलाकर भी देखें तो पिछली बार विपक्ष के सांसदों की कुल संख्या 130 बनती थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा 137 तक पहुंचा है।

तटस्थ दलों को भी ज्यादा बढ़त नहीं

तीन क्षेत्रीय दलों वाईएसआर कांग्रेस, टीआरएस और बीजद ने इस बार 43 सीटें जीती हैं। जबकि पिछली बार इनके पास 40 सीटें थीं। इन दलों को फिलहाल तटस्थ में गिना जा रहा है। इनके विपक्ष के साथ खड़े होने के आसार नहीं हैं। फिर भी यदि इन्हें विपक्ष में मान लिया जाए तो विपक्षी सांसदों की मौजूदा संख्या महज 180 बनती है, जो पिछली बार 170 थी। यानी कुल बढ़ोतरी महज दस सीटों की हुई है।

    Web Title : The decrease in the seats of the UPA allies, the voice of the Opposition in the Lok Sabha