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अंगेजी मीडियम फिल्म रिव्यू

अंगेजी मीडियम फिल्म रिव्यू

फिल्म अँग्रेजी मीडियम
पिता -पुत्री के खुशनुमा रिश्ते की बानगी
निर्देशक
होमी अदाजनिया
अदाकार
राधिका मदान, इरफान, दीपक डोबरियाल, , करीना कपूर, मनू ऋषि, रणवीर शौरी, पंकज त्रिपाठी, पुर्वी जैन, कीकू शारदा, डिम्पल कपाड़िया.

फ़िल्म से पूर्व चर्चा,,

सचिन की 1998 में आई फ़िल्म ऐसी भी क्या जल्दी है, पिता-पुत्री के रिश्ते पर खूबसूरत फ़िल्म इस फ़िल्म को देखते वक्त अनायास याद आ गई, फ़िल्म के ट्रेलर से लगा था कि आधुनिक शिक्षा और अंग्रेजी के महत्व परफ़िल्म का सन्देश होगा लेकिन फ़िल्म पिता-पुत्री का रिश्ता, पिता की फ़िक्रमन्दी, पुत्री के ख्वाबो को पूरा करने की कोशिश मौलिक है यही दिल को छू जाता है । 

शिक्षा भी फ़िल्म एक हिस्सा है फ़िल्म का  लेकिन फ़िल्म कामूल पिता पुत्री के रिश्ते का तानाबाना ही माना जाए तो फ़िल्म दिल तक पहुच जाएगी, फ़िल्म एक लाइन में समझी जाए यो मराठी फिल्म तारिया की बेटी की याद दिलाएगी । 

कहानी

चंपक (इरफान खान) सिंगल फादर की मिठाई की दुकान है, बचपन से अपनी बेटी तारिका(राधिका मदान)को बेहद चाहता है और हमेशा उसे लेकर फिक्रमंद रहता है, जब कि चंपक की पत्नी गुज़र चुकी है,  चंपक उसे माँ का भी प्यार देता है साथ ही अपनी बेटी का हर सपना पूरा करना चाहता है, बेटी का बचपन से सपना है कि यह विदेश जाकर पढ़ाई करे, तारिका बड़ी होती है वह लंदन जाकर आगे की पढ़ाई का सपना अपने पिता के सामने रखती है तो चंपक और उसका चचेरा भाई गोपी(दीपक डोबरियाल) उस ख्वाब को पूरा करने के लिए जुट जाते हैं और इसमें क्या क्या मुश्किलात आती है, और उन मुश्किलों को एक आम आदमी चंपक कैसे पार पाता है या नही 
चंपक की बिटिया की शिक्षा यात्रा भारत से लंदन तक हो पाती है या नही ?? इस जवाब के लिए फिल्म देखनी बनती है
फ़िल्म इरफान की हिंदी मीडियम की आधिकृत दूसरा भाग तो नही है लेकिन यह फ़िल्म दूसरा भाग ही मानकर देखी जाएगी,,

गीत संगीत

एक दो गाने आते है लेकिन वह पार्श्व के रूप में ही बज कर निकल जाते, वह दृश्यो को मजबूती देते है,सचिन जिगर का गाना एक ज़िन्दगी बेहद खूबसूरत बन गया है साथ ही फ़िल्म को आगे बढ़ाता है,  तनिष्क बागची का पार्षवध्वनी भी मोहक लगती है,, गाना एक लड़की पार्षवध्वनी में है जो कि मोहक लगता है, कुड़ी नू नचने दे गाना भी कर्णप्रिय बन पड़ा है, 
अदाकारी
इरफान आम किरदार को खास बनाने की असीम अभिनय क्षमता रखते ही यहां उन्होंने यही साबित कर दिया,इरफान से आप कुछ भी करवा सकते हो, अभिनय का बेताज बादशाह है वह, उसका अभिनय दक्षता, कौशल, दर्शक को बांधने की असीमित ताकत रखता है, अभिनय में मुर्खिया और त्वरित प्रतिक्रिया में कमाल है, राधिका ने पूरा न्याय किया है लेकिन उन्हें अभी हिंदी सिनेमा पर जमे रहने के लिए अभिनय और निखारने की ज़रुरत होगी, दीपक डोबरियाल अभिनय की भट्टी से निकले अदाकार है उनका पूरा दोहन हिंदी सिनेमा में अभी बाकी है,करीना ने भी जितना काम मिला उसे बेहद ईमानदारी से चरितार्थ किया, रणवीर शोरी, डिम्पल कपाडिया, पंकज त्रिपाठी, कुकू का किरदार छोटा था पर सभी ने पूरी शिद्द्त और लगन से अपने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है, करीना और डिम्पल तो किरदार में वह बस गए थे साथ ही इन दोनों की खूबसूरती आज भी बरकरार है,,
कमज़ोर पक्ष
फ़िल्म की लंबाई 143 मिंट को कम की जा सकती थी, खास कर दूसरे भाग में लगभग 10 मिनट की काटछांट बन सकती थी,  गानों के नाम पर फ़िल्म में केवल एक दो गाने है
बजट-सक्रीन्स- 
लगभग 45 करोड़ बजट रखा गया है प्रसार प्रचार के लिए 15 करोड़ कूल 60 करोड़
सक्रीन्स भारत मे लगभग 2200 और विदेशों में लगभग 300 सक्रीन्स पर फ़िल्म प्रदर्शित हो रही है,
बागी 3 का बज़ अभी जारी है तो 3 से 5 करोड़ की ओपनिंग मिल सकती है,हिंदी मीडियम-2017 का कुल कलेक्शन 65 करोड़ था लेकिन यह फ़िल्म उस से ऊपर निकलती दिख रही है, 
क्यो देखे
इरफान की शानदार, उम्दा अदाकारी के लिए फ़िल्म देखी जा सकती है,
स्टार्स
3.5
फ़िल्म समीक्षक 
इदरीस खत्री

    Tags :
    Web Title : English Medium Film Review