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सीएए, एनआरसी में मुस्लिमों के बाद दलित-आदिवासियों का विरोध प्रदर्शन

सीएए, एनआरसी में मुस्लिमों के बाद दलित-आदिवासियों का विरोध प्रदर्शन

अख़बार जगत। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर देश भर में विरोध जारी है। अभी तक विरोध में मुश्लिम समाज था। लेकिन अब विरोध में बोहरा समाज, आदिवासी समाज, नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं व आम जनता ने विरोध दर्ज कराया। सैकड़ों लोगों ने एक आवाज में कहा कि अगर सरकार ने सीएए व एनआरसी वापस नहीं लिया तो हम किसी भी तरह के दस्तावेज नहीं बताएंगे। सरकार द्वारा जबरदस्ती लादे गए काले कानून से हम नहीं डरेंगे।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की चित्तरूपा पालित ने कहा सीएए, एनआरसी में मुस्लिमों के बाद दलित और आदिवासियों के नंबर है, ये जंगल पहाड़ों में रहने वाले लोग विरोध करने आए हैं। देश में लाखों ऐसे है जिनके पास रहने को घर नहीं है, ये लोग कागज कहां से दिखाएंगे। सरकार ने गुवाहाटी, कर्नाटक में जिस तरह से डिटेंशन सेंटर बनवाए हैं, उनमें एक व्यक्ति प्रतिदिन 10 रुपए का खाना खिलाया जाता है। जिस वजह से रोजाना एक मौत हो रही हैं। सीएए सिर्फ देश से खिलवाड़ करने के लिए लाया गया है अगर सरकार को पीड़ितों की चिंता होती तो श्रीलंकाई तमिलों को क्यों छोड़ा गया, रोहिंग्या के पीड़ितों को तो सबसे अधिक मानवता की जरूरत थी। सरकार सिर्फ हिन्दू-मुस्लिम के विवाद को बढ़ाना चाहती है।

विरोध प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि एक बीवी होना बहुत जिम्मेदारी की बात है और पुरुष के लिए उस बीवी को संभालना और अधिक जिम्मेदारी वाली बात होती है किंतु मोदी जी से उनकी बीवी तो संभालते नहीं बना और अब देश भी नहीं संभाल पा रहे हैं। मंच से शमीम सिद्दीक पटेल, आलिमा सना फातिमा, सलमा कादरी के साथ ही कॉलेज पड़ने वाली कई स्टूडेंट्स एवं स्कॉलर्स ने सरकार को एनपीआर एवं एनआरसी को लेकर भविष्य में इससे भी उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी। धरना समापन अवसर पर महिलाओं ने नायब शहर काजी निसार अली और उनकी टीम के 21 सदस्यों का शुक्रिया अदा कर शहर व देश में अमन और शांति की दुआ कर धरना समाप्त किया।

    Web Title : Dalit-tribals protest after Muslims in CAA, NRC